डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकरजी कि १९२३ में "द प्रोब्लम ऑफ़ रूपी" यह ३०९ पेज वाली किताब प्रकाशित हूई है । जो दुनियां के सारे आर्थशास्त्रीयों का संशोधन का स्त्रोत है ।अमेरिका जैसा देश आज इस किताब के बलबूते ही आज दुनियां में आर्थिक महासत्ता बना है । बाबासाहब के इस उपकारों को हमेशा के लिये याद रखने के लिये अमेरिका ने अपने देश में स्थित दुनियां कि सर्व श्रेष्ठ कोलंबिया युनिवर्सिटी में डॉक्टर बाबासाहब आंबेडकरजी का स्टेच्यू अमेरिका के अध्यक्ष मा.बराक ओबामा के हस्ते लगवाया है । जो हम भारतीय के लिये एक असाधारण गर्व कि बात है । डॉक्टर बाबासाहब आंबेडकरजी ने अपने इस किताब में "भारतीय रिज़र्व बैंक " निव रखी है । इस किताब में उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्यप्रणाली को नियमबध्द किया है ,जो एक अदभूत और अविश्वसनीय कार्यप्रणाली कि मिसाल है । यह सारी दुनियां को और दुनियां के अर्थशास्त्रीयों को हैरान करनेवाली किताब मात्र उन्होंने २५ वर्षों के उम्र में लिखी है ,जो स्कूल का प्रबंध था ,जो आगे चलकर पूस्तक के रूप में प्रकाशित हूवा है । भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक कि स्थापना १ एप्रिल १९३५ को हूई है । जीसकी आधारशिला बाबासाहब डॉक्टर भिमराव आंबेडकरजी ने रखी है । भारतीय रिज़र्व बैंक कि स्थापना १९३४ के एक्ट नुसार ब्रिटिश शासन में हूई है । जीसका मुख्यालय कोलकाता में था उसे स्वतंत्रता के बाद । मुंबई में स्थानान्तरीत कर दिया है । इसके पहले भारत देश में बैंकऑफ बंगाल ,बैंक ऑफ कोलकात और बैंक ऑफ़ बॉम्बे यह तीन बैंक कार्यरत थी जीसे रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया कि स्थापना के बाद समाप्त कर दिया है ।
आपने देश कि जनता और सरकार के लिये यह शर्म कि बात है कि जीस बाबासाहब डॉक्टर भिमराव आंबेडकरजी ने रिज़र्व बैंकऑफ इंडिया स्थापना कि है उस महान व्यक्ति के नाम का रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के इतिहास में उल्लेख भी नही है । पर सारे गर्वनर ,उप गर्वनर और सारी दुय्यम दर्ज के लोगो के फोटो के साथ नामोल्लेख भी है ।
आप बाबासाहब का "द प्रोब्लम ऑफ रूपी"आवश्य पढ लेना तब जाके आपको भारतीय राज नेता कितने जातीयवादी और हल्के विचारों के है इस बात का पता चल जायेगा । अब ऐसे भेदभाव करने वाले लोग के हातो में सरकार है तो भारत के चलन पर भेदभाव करने वाले मोहनदास करमचंद गांधी कि नही तो क्या नोलेज ऑफ सिम्बोल बाबासाहब आंबेडकर कि आयेगी ?
(माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
रविवार, 24 सितंबर 2017
भारतीय रिज़र्व बैंक और माहात्मा गांधी
शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
क्या मराठा जात ब्राह्मण धर्म नुसार अच्छुत है ?
शिक्षा कि पंढरी कहे जानेवाली नगरी और मनुवादी सोच का गढ पूणे के सिंहगड इलाके में एक चौकानेवाली घटना घटी है । जानकारी के अनुसार डॉ. मेधा कुलकर्णी (उम्र 50) ने पुणे के धायरी में रहनेवाली निर्मला यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है ।डॉ. मेधा खोले मौसम विभाग में उच्च पद पर कार्यरत हैं। डॉ. खोले के घर में हर साल गणपति विराजमान किया जाता है । साथ ही माता पिता का श्राद्ध विधी भी होता है । शास्त्रों नुसार बाकी सभी जातीयों कि महीलाऐं निच होने के कारण धार्मिक विधी में खाना बनाने के लिए सिर्फ उनको ब्राम्हण महिला ही चाहिए होती है ।निर्मला यादव मई 2016 में काम ढूंढते हुए डॉ. खोले के घर गई और मैं धार्मिक विधी में खाना बनाने का काम करती हूं ऐसा बताया था । डॉ. खोले ने महिला से पूछताछ की और महिला को तुरंत काम पर रख लिया था । यह महिला डॉ. खोले के घर में हर धार्मिक विधी में खाना बनाया करती थी ।महिला ने 2016 में श्राद्ध के समय, सितंबर महीने में गौरी गणपति के समय और 2017 में भी गणपति और माता पिता के श्राद्ध के समय भगवान को भोग के रूप में चढ़ाए जानेवाला भोजन बनाया था ।निर्मला ब्राम्हण नहीं है । बल्कि शूद्र जाती कि है । इस बात की जानकारी डॉ. खोले के गुरूजी ने दी । काम पर लगने से पहले निर्मला ने अपना पूरा नाम निर्मला कुलकर्णी बताया था । जबकि निर्मला का असली नाम निर्मला यादव है । यह बात पता चलते ही डॉ. मेधा खोले निर्मला के घर पूछताछ करने गयी । तब निर्मला ने अपना सही नाम निर्मला यादव बताया ।इस बात को लेकर दोनों में काफी बहस हुई और हाथापायी भी हुई है । दोनों ने इस दूसरे के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवायी है ।
निर्मला की शिकायत के अनुसार डॉ. मेधा खोले के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करवायी है और निर्मला को उसके काम के पैसे नहीं देने के मामले में भी धोखाधड़ी की भी शिकायत दर्ज करवायी है । देखा जायें तो ऐसी घटना इस देश में पहली बार नही हूई है ।
यह भेदभाव का अमानवीय व्यावहार हजारो सालो से चलते आया है । पर खुदको क्षत्रीय समझनेवाला ( ब्राह्मण धर्म नुसार मराठा समाज शूद्र समाज है।क्योंकि परशुराम ने कुल्हाड़ी से सारी क्षत्रिय वंश का पूरे २१बार समूल उच्चाटन किया है । फिर भी मराठा खुदको क्षत्रीय समझता है । और ब्राह्मण उनको बार बार शूद्र होने का ऐहसास दिलाता है ।जिसका पूणे का यह ताजा मामला है ) यह मराठा समाज इस ब्राह्मण अत्याचार को अपना धर्म और कर्तव्य समझकर सब तरह के अत्याचार सहन करते आ रहा है । मराठा ब्राह्मण धर्म के भेदभाव करनेवाले जातीय अत्याचार के हिन श्रेणी में समाहित है ।इस ब्राह्मण अत्याचार को अपना धर्म समझकर पालन करता आ रहा है । इस दलदल से बाहर निकालने के लिये मराठा समाज के बहोत सारे माहान व्यक्तियों ने अपना जीवन दाव पर लगा दिया है । फिर भी परिस्थितियाँ २१ वि सदियों में भी मध्य युग के जैसी हि है ।
इतिहास पर नजर डालेंगे तो मराठा शब्द कि उत्तपत्ती छत्रपती शिवाजी महाराज के कार्यकाल में हूई है ।छत्रपती शिवाजी महाराज का जो १८ पगड जाती वाला सैन्य था ।उस सैन्य को मराठा कहा जाता था ।अब यह शब्द एक जाती वाचक बन गया है ।ईसीलिये मराठा यह शब्द आपको वेद ,शास्त्र, पूराणों में नही मीलता है ।मराठा शब्द संत तुकाराम माहाराज के समय के पहले कही पर भी आपको देखने को नही मीलता है ।क्योंकि भारत में अभी ब्राह्मण और वैष्य को छोड दे तो सारी जातीया मूल कि द्रविड़ और भारतीय है । ब्राह्मणोने भारत देश पर अपनी राजकीय, धार्मिक ,आर्थिक और सामाजिक पकड मजबूत करने के लिये वेद द्वारा वर्ण भेद किया और द्रविड़ इस मूलनिवासी भारतीय कोम में फूट डाली है । आगे चलकर वर्ण से भी वैदिक ब्राह्मणो को तकलीफ होने लगी थी ।ईसीलिये उन्होंने वर्ण से भी आगे जाकर जाती प्रथा का निर्माण किया है । ईस तरह वैदिक ब्राह्मणो इस द्रविड़ कोम का छोटे छोटे तुकडों का ४५०० जातीयों में बटवारा कर दिया है । जो आज अपना सही इतिहास भूलकर एक दुसरे कि जान कि दुष्मन बनी है ।
फोडो और राज करो यह अंग्रेज़ो कि निती है ।यह बात सौ प्रतीशत सही है । पर यह ईस्ट इंडिया कंपनी वाले अंग्रेज़ नही है । यह वैदिक अंग्रेज़ है जो पाकिस्तान के खैबर खिंडी से घुसपैठ करके भारत देश पर आक्रमण करके कब्जा कर बैठे है ।आप लोकमान्य बाल गंगाधर टिलक कि "आर्टिक होम इन वेदाज " इस किताब का अध्ययन करोगे तो इन सारे सात्यों का आपको पत्ता चल जायेगा ।
राजा बली के साथ ब्राह्मण वामन ने छलकपट किया है । संत तुकाराम महाराज के साथ भी ऐसाही कपट हुआ है । राजा छत्रपती शिवाजी महाराज के साथ छत्रपती संभाजी महाराज के साथ भी कपट हूआ है ।राजहर्षी शाहू महाराज के साथ भी ऐसा ही कपट हूआ है । दिनकरराव जवळकर के साथ भी कपट हूआ है क्योंकि उन्होंने "देशाचे दुश्मन " यह ब्राह्मणो कि पोल खोलने वाली किताब लिखी थी । पंढरपूर के विठ्ठल मंदिर मे बडवे और उत्तपात नाम के ब्राह्मण पूजारीयोंने सदियाँ से मंदिर के तिर्थकुंड में अपना मूत्र वित्सर्जन करके वह तिर्थ के रूप में सारे विठ्ठल भक्तों को पिलाया है । अब इस अत्याचार को सहन करना इस द्रविड़ कौम का आज के मराठा समाज का धर्म बनगया है । जिसका पालन करने में वह गर्व महसूस करते है ।
(महाआचार्य मोहन गायकवाड)
गुरुवार, 14 सितंबर 2017
भेदभाव करनेवाली सरकार और जनता विकास कि आस में
आज देश में जो सरकार है ।वह जनता में वर्ण ,धर्म और जातीगत भेदभाव करने वाली है ।ऐसे स्थिति में क्या देश का विकास हो सकता है?
जैसे कि आप देख रहे है कि देश विकास के नामपर थम चुका है । बस न्यूज पेपर, न्यूज टीवी ,सोशियल मीडिया और सरकार द्वारा विकास कि बड़ी बड़ी बाते हो रही है । लेकिन जब सत्य तक पहूँचते है तो सब दावे खोखले साबित हो रहे है । चाहे रोजगार हो, जिडिपी हो ,रेल हो ,टेक्स हो,रस्ते हो,शिक्षा हो ,उच्च शिक्षा हो,तात्रिक शिक्षा हो,आरोग्य हो ,आर्थिक हो,नोटबंदी हो,आतंकवाद हो ,नक्षलवाद हो,उद्योग हो,नये उद्योग हो,विमान विकास, सूरक्षा ,नये रेल मार्ग, नोटबंदी से पैसा कि कमी कि वजह से सब थम चुका है । रेल स्टेशन,जमीन ,मिल् और टेंडर बेचकर यों त्यो करके सरकार चलाई जा रही है ।
नोटबंदी कि वजह से लोगो का इनकम कम हो गया है । कंपनियां घाटे में चलने कि वजसे लाखो लोग अपनी नोकरीयां गवा चुके है । जिएसटी कि वजह से मंहगाई अपनी चरम पर है । किसानों कि हालात बेकार है ईसीलिये वह आत्महत्या कर रहा है ।विद्यार्थियों कि स्कोलरशिप बंद कर दि गई है ।ईसकि वजह से विद्यार्थी भी मजबूर होकर आत्महत्या कर रहे है । वेतन आयोग के नामपर कर्मियों को ठका जा रहा है । सब तरफ परेशानी का माहौल है ।ऐसे स्थिति में मंत्री लोग पूरी दुनिया कि चक्कर काटकर पिकनिक का आर्थिक बोझ जनता पर लाद रहे है ।
सफाई के और जिएसटी के नामपर १००₹ कि मोबाइल रिचार्ज पर सिर्फ ७२₹ का ही टाँक टाईम मिल रहा है । हर जगह हर बिल पर ऐसे ही सफाई टेक्स के नामपर जनता के पैसो कि सफाई हो रही है । मूघलो के जिजीया कर से भी भयानक ईस सरकार के टेक्स साबित हो रहे है ।
जाती ,वर्ण और धर्म के नामपर भेदभाव को बढ़ावा देने का काम बड़े जोरों पर है ।आरक्षण के आधिकार को खत्म किया जा रहा है । ओबीसी, एससी, एसटी एनटी विएनटी कि आरक्षित जगह कम करके कुछ विशिष्ट समुदाय को फायदा पहूचाया जा रहा है । और बुध्दिजीवी लोगो के हत्याकांड हो रहे है । हूकूशाही का माहौल पूरे देश में है ।जो देश हितो के खिलाफ है ।भेद निती के चपेट में सारा देश आचुका है ।अब जनता के हाथो में २०१९ के ईलेक्शन कि चाबी है । अब लोगो पर इस बात का फैसला है ।
सत्यमेव जयते
( माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
शनिवार, 9 सितंबर 2017
मराठा जाती के महीलाने छुवा तो ब्राह्मण धर्म हूवा भ्रष्ट ।
बात यह है कि पूणा में २०१७ के गनपती उत्सव के समय में खाना बनानेवाली मराठा निर्मलाबाई यादव और ब्राह्मण मेधाबाई खोले के बिच का यह मामला है ।वेद शास्त्रों द्वारा ईश्वर निर्मित ईस महान हिन्दू धर्म कि महान देवता जो सूख करता दुख:हरता और विघ्नहर्ता है ।वही देवता ने मराठा और ब्राह्मण समाज में विघ्ननिवारण करने के बजाय छुवाछुत में बदल डाला है ।हूवा यू कि गनपती उत्सव के दरम्यान कुच्छ रस्म होते है जो करने से देवता प्रसन्न हो जाती है और देवता को जो मांगा वह मिलजाता है ।लेकिन खोलेबाई और यादवबाई के गनपती बाप्पाने एक सामाजिक धृविकरण का भेद का पहाड़ निर्माण किया है । जो इस देश के सामाजिक व्यवस्था को अगले १०/१५ साल में बदल देगा और एक नये यूग कि सूरवात करेगा । यादवबाई ने अपनी जाती छुपाकर खोलेबाई को खाना बनाके खिलाया है । जिसके कारण खोलेबाई का धर्म भ्रष्ट हो गया है और गणेश देवता भी क्योंकि यादवबाई कि जाती मराठा है जो वर्ण व्यवस्था में शूद्र है ।और याद रहे शूद्र जाती ने ब्राह्मण जोती को छुने से खाना खिलाने से अपवित्र और भ्रष्ट हो जाता है । और यहा इस गणपती उत्सव के दरम्यान पूणा में यह हो गया है ।जब खोलेबाई को इस बात का पता चला तो खोलेबाई ने यादवबाई पर सिंहगड में पूलिस में केस दर्ज किया है ।अब यह मामला कोर्ट में जायेगा और ईसका रिझल्ट आयेगा । लेकिन समाज का एक सामाजिक कोर्ट भी होता है जो अगले कुच्छ सालो में ईसका परिणाम जरूर देगा ।वह अपना फैसला जरूर सूनायेगा ।
सरकार का टेंडर जनता हत्या के लिये ?
टेंडर याने ठेका पध्दति से मनुवादी सिस्टम को होनेवाले फायदे और ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो का होनेवाला नुकसान जो मनुवादी चाहते हैं ।
१) मनुवादियों को भारत देश के संविधान को विरोध है क्योंकि भारत का संविधान ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो को भी समान आधिकार कि बात करता हैं ।
२) ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो को जिस आरक्षण कि वजह से समान आधिकार मिल रहे है उस आरक्षण को ही मनुवादी खत्म करना चाहते है ।ईसीलिये हमेशा वह आरक्षण को बदनाम करते रहते है ।
३) ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो का आरक्षण को यानी ठेका टेंडर पध्दति से खत्म कारने का मनुवादियों का एक छडयंंत्र है ।
४) ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो को शास्त्रों नुसार धन और संपत्ति जमा करने का आधिकार नही है । ईसीलिये टेंडर पध्दति से ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो का शोषण के साथ निर्धन करने का एक खास कार्यक्रम है ।
५) ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो को टेंडर द्वारा शोषण करके वर्ण व्यवस्था नुसार निचे याने चौथे शूद्र वर्ण में आरक्षण यानी आधिकार नकारकर रखने का एक उद्देश्य है ।
६) टेंडर द्वारा शोषण वादी व्यवस्था का निर्माण करने का मनुवादी का उद्देश्य है ।
गोरखपुर १२आँगष्ट २०१७ बिआरडी मेडिकल कोलेज ६२ से भी बच्चों कि मौत एक ही समय में हूई ईसका कारण है टेंडर सिस्टम यानी ठेका पध्दति जो मनुवादियों द्वारा ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी याने शूद्रो को मारने के लिये निर्माण कि गई है एक सिस्टम है । ईस टेंडर सिस्टम को समझना ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी को ईतना आसान काम नही है । क्योंकि इन ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी को जाती ,धर्म,वर्ण ,शास्त्र,पूराण, धार्मिक ग्रंथ के माध्यम से मनुवादियों ने भेद डालके रखे है ।जिसे भेदना ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी कि बस कि बात नही है ।
अपना देश टेंडरो पर चल रहा है । कपास कि सरकारी हौस्पिटल मिलने वाले रूई से लेकर आसमान में उड़ाने वाले किंगफिशर ऐअर लाईन्स जिसने टेंडर द्वारा भारत देश को बरबाद करके इग्लैंड में अपनी अलिशान संपत्ति जमाईं है । इसपर चर्चा करने के लिये ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी के पास समय नही है । क्योंकि मनुवादी ग्रंथ कहते है कि शूद्रोने यानी ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी ने ब्राह्मण जैसे बोलता है वैसे ही रहना चाहिए और कार्य करना चाहिए इसका मतलब ओबीसी, एससी, एसटी, एनटी, व्हीएनटी ब्राह्मणो के अधिन है । उनके पास खुदकी सोच नही है । अगर खुदकी सोच होती थी तो वह अपने अधिकार के लिये ईस मनुवादी व्यवस्था से लढते थे ।उनको अपनी गुलामी मंजूर है ।
( माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
शुक्रवार, 8 सितंबर 2017
भारतीय समाज के अधोगती के कारण ।
वैसे देखा जायेगा तो व्यक्ति व्यक्ति से परिवार, समाज ,गांव, शहर ,और फिर प्रांतो से राष्ट्र बनता है । इन अलग अलग भलेबुरे सोच वाले सारे लोगो को जब तक आप कुछ समाज उपयोगी नियमों में बांधते नही है तब तक समाज का सही संचलन होना संभव नही है ।ईसीलिये अगर मानवीय समाज को सही दिशा देनेकी है तो आपको धर्म नियमों को बाजू रखकर बिना भेदभाव वाले निसर्गदत्त नियमों को अमल में लाना जरूरत होती है ।क्योंकि धर्म नियम भेदभाव के समर्थक है । ईसीलिये निसर्ग नियम जरूरी है , ताकि एक भेदभाव विरहित समाज का निर्माण हो सके । ऐसे मानव समाज उपयोगी नियमों को ढुंढने कि कोशिश में मानव आदिमानव काल से लेकर आज तक करता आ रहा है ।और मानव समाज ईस नियमों को खोजने में सफल भी रहा है ।लेकिन समष्या यह पैदा हो गयी है कि यह अलग अलग नियम अलग अलग धर्म ग्रंथो में होने कि वजह से आज मानव समाज भ्रमित है । आज मानव समाज यह तय नही कर पा रहा है कि कौन से नियम ?कौनसा धर्म ?और कौनसा ईश्वर सही है ? क्योंकि सभी धर्म, सभी नियम और सभी ईश्वर अलग अलग है ।अब इन ईश्वर वादियों का कहना है कि उनका धर्म ,धर्म नियम और धर्म ग्रंथ ईश्वरने लिखे है ,तो यह बड़ा कठिन और चक्कर वाला मामला है ।
भारतीय समाज याने द्रविड़ सभ्यता कि अधोगति के मुख्य कारणो का जब तक भारतीय लोगो को पता नही चलेगा तब तक भारतीय लोगो कि सही दिशा नही मिलेगी और नही भारतीय समाज कि प्रगती संभव होगी । आप यह समझलो कि आज कि तारीख में भारतीय समाज अपनी मूल सभ्यता को भूल चुका है । वह अपनी भारतीय संस्कृति को भूलकर विदेशी और परकीय सभ्यता को अपनाकर टालीयां पिटकर उसपर गर्व कर रहे है ।
ओ कौन से कारण है ? जिस के कारण भारतीय लोगो कि अधोगति हूई है ।
१ ) अपनी हरप्पा मोहनजोदड़ो मूल सभ्यता को भूलना : दुनिया कि सबसे पहीली और विकसित सभ्यता द्रविड़ सभ्यता रही है ।जो दुनिया के लिये एक मिसाल है । भारतीय लोग इस महान द्रविड़ सभ्यता को वैदिक आर्यों कि संस्कृति के जाल में फसने के कारण वह अपना मूल रूप खो चुके है ।अब भारतीय लोगो के दिमाग का कब्जा वैदिक इस युरोपियन संस्कृति ने लेने के कारण भारतीय लोग अपना वैदिक आर्यों से संघर्ष का इतिहास भूल चुके है । द्रविड़ लोग वैदिक आर्यों से संघर्ष में हारने के कारण आपनी विरता को भूल गये है । परिणाम स्वरूप उन्होंने आर्यों का मांडलिकत्व स्वीकार किया है । अब वह वैदिक आर्यों को अपना स्वामी समझ रहे है ।
२ )द्रविड़ सभ्यता को त्यागना : वैदिक आर्यों ने द्रविड़ याने भारतीय लोगो को अपने वश करने के लिये तरह तरह के हथखंडे अपनाने के कारण और वैदिक आर्यों का मोहजाल ना समझने के कारण वह आर्यों के अधिन हो गये है ।ईसीलिये भारतीय लोगो को अपनी द्रविड़ सभ्यता को त्यागना पडा है । अब पूरी तरहसे वह अपनी द्रविड़ सभ्यता को भूल चुके है ।
३)युरोपियन संस्कृति को अपनाना : याद रहे इतिहास यह कहता है कि वैदिक संस्कृति यह भारत कि सभ्यता नही है ।वह युरोपियन याने युरेशियन आर्टिक प्रदेश में कालासागर यहा कि मूल संस्कृति है । वहापर संस्कृत भाषा मिश्रित भाषा आज भी मौजूद है ।ईसीलिये वैदिक आर्यों कि मूल संस्कृति युरोपियन संस्कृति है ।
४)वैदिक वर्ण भेद को अपनाना : वैदिक आर्यों के ग्रंथ ईश्वर निर्मित है । ऐसा वैदिक लोग कहते है ।और वैदिक ग्रंथों में वर्णभेद है ।जो उंच निचता का समर्थन करते है ।वैदिक आर्यों के ग्रंथों पर विसवास करते है तो ईश्वर भेदभाव का समर्थक है और वर्ण के उंच निचता को बढावा देता है ।
५)वैदिक भेदभाव को अपनाना : वैदिक ग्रंथ वर्ण भेदभाव तो करते हि है और उपरसे जातीवाद और जाती भेद भी करते है । ईस भेदभाव को द्रविड़ लोगोने स्वीकार करने के कारण भारतीय द्रविड़ सभ्यता नष्ट हो गई है ।
६ )दैववाद को अपनाना : द्रविड़ याने भारतीय लोग दैववादी नीही थे । वैदिक आर्यों ने भारत देश पर कब्जा करने के बाद द्रविड़ लोगो को वश करने के लिये अनेक देवताओं का निर्माण किया और द्रविड़ लोगो को शांत किया है ।अब द्रविड़ लोग पूरे वैदिक आर्यों के अधिन हो चुके है । वह अब अपना प्रातः विधि भी वैदिक दिशानिर्देश नुसार करते है और बाकी के सभी कर्मकांड भी ।
७) स्वर्ग नर्क संकल्पना का स्विकार : वैदिक आर्यों कि स्वर्ग, नर्क कि संकल्पना ने भारतीय लोगो का दिमाग पूरा के पूरा भ्रमित और डरपोक बना दिया है । जो वैदिक आर्यों कि भविष्य देखने कि रोजगार हमी योजना है और प्रभूत्व ठेका भी ।
८ ) वैदिक आर्यों द्वारा ईसलाम का स्विकार करना : अपना हेतू साध्य करने के लिये गौरी जैसे शेकडो वैदिक लोगोने ईसलाम कबूल करके बादमें लाखो भारतीय लोगो को किसीको लालच देकर तो किसीको धमकाकर तो किसीको मजबूर करके तो किसीको सत्ता के नामसे ईसलाम में ढकेल दिया है ।
९ ) छडयंत्र सभे भारतीयो को ईसाई धर्म में ढकेलना : वैदिक आर्यों का उद्देश्य साफ है कि भारतीय लोगो को वर्ण ,जाती ,सत्ता और अलग अलग धर्म में विभाजित करके उनके देश पर कब्जा और सत्ता प्राप्त करनी है । जिसमें वैदिक आर्य सफल रहे है ।क्योंकि वह विदेशी होने के कारण सारे विदेशी ताकतों के साथ ही रहे है और विदेशी ताकतों का समर्थन भी किया है और उनके धर्म भी भारत देश में फैलाने में मदत कि है ।
१०) अग्यानता में फस जाना : भारतीय लोग भोले है ।वह किसी पर भी विसवास करते है । वैसा हि विसवास वैदिक आर्यों पर किया था । पर वैदिको का हेतू द्रविड़ लोगो पर राज करने का होने के कारण उन्होंने भ्रम फैलाने वाले ग्रंथ निर्माण किये और उन ग्रंथों के माध्यम से अग्यान फैलाकर भारतीय लोगो को अकलमंद बना दिया है ।
१२) सत्य मार्ग से अनभिज्ञ रहना : भारतीय लोग वैदिक आर्यों के अग्यान और दैववाद में फसे होने के कारण वह सत्य मार्ग से अनभिज्ञ है । वह सत्य को जानते नही है ।
१३)छडयंत्र में फसना : भारतीय लोग याने द्रविड़ लोग वैदिक आर्यों के साम, दाम ,दंड और भेद के छडयंत्र में फसने के कारण ।वह अपनी पेहचान और सभ्यता को भूलचूके है । वह वैदिक आर्यों के ग्रंथों के जाल में फसने के कारण आज वह हाताश है निराश है और ऊनको सत्य का ग्यान न होने के कारण आपस में हि भेदभाव करके आपस में हि लढकर एक दुसरे को मिटा रहे है ।
१४) एक दुसरे से श्रेष्ठता कि भावना रखना : वैदिक आर्यों ने अपने भेद करने वाले ग्रंथों के माध्यम से भारतीय याने द्रविड़ लोगो में वर्ण ,जाती ,पोटजाती ,वंश और गण के माध्यम से फूट डाली है । और भ्रामक ग्रंथों द्वारा भारतीय लोगो पर अपना अंकुश निर्माण किया है ।
१५) माहापूरूषो के विचारों का अभाव : वैदिक आर्यों के ग्रंथों के चपेट में आने के कारण द्रविड़ लोगोने तथागत बुध्द के पंचशीलों को त्याग दिया है और माहापूरूषो के विचार अस्विकार किये है । ईसीलिये वह वैदिक आर्यों के दैववाद और कर्मकाण्डों में पूरी तरहसे फस चुके है ।जो उनके अधोगति का कारण है।
यह सब भारतीय लोगो के याने द्रविड़ लोगो के अधोगति के मूख्य कारण है ।जारा आप ध्यानसे ईन सभी कारणों का अध्ययन करोगे तो आपको सत्य जरूर अवगत होगा और अपनी अधोगति को रोकने में आपको जरूर सफलता मिलेगी । क्योंकि परिवर्तन सृष्टि का सिध्दांत है । जो निरंतर चलता है । ईश्वरीय धर्म और ऊनके धर्म अपरिवर्तनीय है जो सृष्टि परिवर्तन सिध्दांत के खिलाफ है । क्योंकि वह मानव निर्मित है । भला एक ईश्वर अनेक धर्म व धर्म ग्रंथ क्यों निर्माण करेगा ? अग्यान हि तो आपके अधोगति का कारण है ।
(माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
पापी व्यक्ति के लक्षण ।
जहा नैतिक मूल्यों का पतन होता है वहा सामाजिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है । और जहा सामजिक स्वास्थ खराब है वहा समाज का पतन होता है । ईसीलिये नैतिक मूल्य पर मानवी समाज का स्वास्थ और अस्तित्व टिका है । जहा नैतिक मूल्यों का अभाव होता है वहा मानव एक पशू के जैसे व्यावहार करता है । उसके अंदर का इन्सान मर जाता है और वह अमानवीय व्यावहार करने लगता है । ईसीलिये नैतिक मूल्य मानव होने के लक्षण है । जिनके पास नैतिक मूल्य नही है समझो वह मानव के रूप में एक दानव है । मनपर बगैर नैतिक मूल्यों से काबू पाना महाकठीण काम है ।वह कब अपना भयंकर रूप कब धारण करेगा ईसका कोई भरोसा नही है ।
मानव के रूप में दानव को पहचानने का एक आसान तरीका है । ईसीलीये यह सभीको अवगत होना मानव जाती के हितों में है ।हो सकता है कि आप भी उनमें से एक है ? लेकिन आप ईस बात से परिचित नही है । हो सकता है यह सत्य जानने के बाद आप भी बदल जाओगे और एक मानव बन जाओगे ।
इन्सान में अग्यान होने के कारण वह अपने मार्ग से भटक जाता है । वह जब सत्य मार्ग से भटक जाता है तो उसे दुष्कर्म अपनी ओर खिंचते है । वह व्यक्ति को सत्य मार्ग का पता ना होने के कारण वह दुष्कर्म को हि सत्य मार्ग समझ बैठता है और फसता जाता है ।वह दुष्कर्म में ईतना अधिन हो जाता है कि वह एकदम दिमागी से अंधा बन जाता है ।वह पापो के पहाड़ बनाता है ।अन्त में उसे पिडाये घेर लेती है और उसका तन मन यातनाओं से जरजर होता है जिसे नरक यातना कहा जाता है ।कर्म सिंध्दांत कहता है कि आपने जो भले बूरे कर्म किये है उन सभी कर्मों का परिणाम चाहे देरसे क्यों ना हो लेकिन आता जरूर है । भले कर्मों का भाला परिणाम और बूरे कर्मों का बूरा परिणाम आता जरूर है । जैसे मिठे आम के पेड़ को मिठे आम आते है और खट्टी ईमली के पेड़ पे खट्टी ईमली । अगर आपने आम खाये है आपके लिवर खराब नही होंगे क्योंकि लिवर खराब शराब सेवन से होते है आम से नही ।मतलब जैसी करनी वैसी भरनी ऐसा हिसाब होता है। ईसीलिये याद रहे कि दुष्कर्म करना इन्सानों का काम नही है । यह काम हैवानो का है दानवों का है ।ईसीलिये आपको दानव और मानव के कार्यो का पता होना बहोत जरूरी है ।तभी तो आपको मानव और दानव में का फरक समझमें आयेगा ।नही तो आप आपके साथ रहने वाले दानव को भी समझ नही पाओगे और मानव को भी ।
आपने जो दानव का काम किया है । जो पाप किया है वह किसी भी नदिमें नाहाने से पूजा आर्च्या से कर्मकांड से यग्ययाग से भग या पशू बली से या चढावे से कभी भी धुलता नही है । वर कम होने के बजाय और बढता है । जैसे आप अगर कोई कक्षा में फेल हूये है और आपने पोस्ट ग्रेजुएट कि शिक्षा अच्छे मार्क के पास किया है फिर भी आपका पांचवीं फेल का धब्बा जिंदगी भर आपके साथ रहता है बस पाप पूण्य का खेल भी ऐसाही है । पाप का धब्बा आप कोई कर्मकाण्ड करके धो नही सकते है ।ईसीलिये आप पहले ही सजग हो जाईयेगा ।
ईसीलिये आप यह तथागत बुध्द के पांच तत्व का अंगिकार कर सिर्फ मानव हि नही एक उच्च मानव भी बन सकते है ।
१) आपको किसी भी प्रकार का अपने काया ,वाचा और मन से हिंसा भरा काम नही करना चाहिए क्योंकि हिंसा करना मानव का काम नही है ।
२) आपको किसी भी प्रकार कि अपने काया ,वाचा और मन से कोई भी प्रकार कि चोरी नही करनी चाहिए ।
३) आपको किसी भी प्रकार का अपने काया,वाचा और मन से व्याभिचार नही करना चाहिए क्योंकि आप इन्सान है पशू नही है।
४) आपको किसी भी प्रकार का अपने काया ,वाचा और मन से झुठा काम या झुठी वाणी का ईस्तेमाल नही करना चाहिए ।
५) आपको किसी भी प्रकार का अपने काया ,वाचा और मन से नशापान नही करना चाहिए । क्योंकि नशापान करना दानव का काम है इन्सान का नही ।
जब तक आप यह पांच बातें अपने में उतारकर कार्य नही करते है तो आपका इन्सान बनना संभव नही है ।
(माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
आपके अधिकार और सरकार
भारत देश कि जनता को भारत के संविधान ने कुछ मौलिक और कुछ नैतिक अधिकार दिये है ।कायदे मंडल ,न्याय मंडल तथा कार्यकारी मंडल इन तीन संस्था को भारतीय संविधान के दायरे में रहकर भारतीय लोगो को न्याय दिलाने के लिये अपना कार्य करना पड़ता है । पर क्या ऐसा हो रहा है ? अगर आपको अपने अधिकार चाहिए तो आपको इन तीनो संस्था के अधिकार और कर्तव्य अवगत होना जरूरी है । तभी आपके समझ में आयेगा कि कौन संविधान के दायरे में रहकार कार्य कर रहा है और कौन दायरे के बाहर ?
भारत देश के संविधान ने दोनो सदनो को संविधान के दायरे में रहकार और जनता के मौलिक आधिकार को छोड़कर नये कायदे बनाने कि अनुमति दि है । जनता को अन्न ,वस्त्र, निवारा, शिक्षा, रोजगार ,आरक्षण और अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य को अबाधित रखते हूये दोनो सदनों को कानून बनाने कि अनुमति भारतीय संविधान ने दि है । तो क्या भारतीय जनता के साथ दोनो सदन न्यायपूर्ण कार्य कर रहे है ? अगर आपको न्याय नही मिल रहा है तो समझो सरकार संविधान के और जनता के साथ धोखाधड़ी कर रही है ।जिसे भारतीय संविधान नुसार देशद्रोह कहा जाता है क्योंकि दोनो सदनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के समक्ष संविधान के दायरे में रहकार कार्य करने कि शपथ खाई होती है।अगर यह प्रतिनिधि संविधान के विपरीत कार्य करते है तो यह जनता के साथ धोखाधड़ी है ।सत्ता में बैठे पक्ष विपक्ष में वैचारिक मतभेद हो सकते है ईसका मतलब यह नही है कि आप पूर्वग्रह के साथ भारतीय जनता के साथ अपने तरिके से भेदभाव करके उनपर अपने आधिकार का गैर ईस्तेमाल करें । जनता तो ईलेक्शन में लालच देकर ईलेक्शन जितना और उसके पश्चात विपरीत कार्य करना गलत है ।जनता के साथ भेदभाव करके अपने कुच्छ खास लोगो को फायदा पहूचाना और कुच्छ लोगो के अधिकार छिनना और उनको आधिकारो से वंचित करना ईसे शासन नही कहा जा सकता है । यह तो धोखाधड़ी है ।जब जनता किसी पक्ष को सत्ता में बिठाती है तो तब सत्ताधारी पक्षने बिना भेदभाव से समग्र जनता का विकास और आधिकार का विचार करना चाहिए जो देश कि अखंडता को अबाधित रखता है । क्योंकि भारतीय संविधान निरपेक्षता का समर्थक है जो बिना भेदभाव से देश के हर व्यक्ति के आधिकार के रक्षा का समर्थन करता है । और देश के हर व्यक्ति के आधिकार के रक्षा का सरकार का दाईत्व है ।
कायदे मंडल कार्यकारी मंडल और न्याय मंडल ने बिना भेदभाव से जनता के साथ निरपेक्षता से उनके आधिकार और न्याय कि रक्षा करनी चाहिए । तभी देश मे सामाजिक शैक्षणिक आर्थिक रूप में सभी देशवासियों को न्याय मिलेगा और परिणाम स्वरूप देश का सभी प्रकार का और सही विकास होगा ।
अपने देश का सभी प्रकार का विकास तभी संभव होगा जब यह तीनों संस्थाऐ देश के हर व्यक्ति को देश संपत्ति का दर्जा देकर उनके पालन, पोषण, संगोपन और विकास कि जिम्मेदारी उठायेगी ।विश्व भर में जिन राष्ट्रोने यह सिंध्दांतों अपनाया है आज वह राष्ट्र प्रगत हो गये है । और अपने देश में सरकार में बैठे लोग भेदभाव करने वाले होने के कारण जाती, धर्म, वर्णभेद के समर्थक होने के कारण कर्मकाण्ड दैववाद धर्म वाद ईश्वर वाद और जातीवाद फैलाने पर अधिक शक्ति खर्च करती है । जिसके कारण सरकार कि सारी शक्ति और धन विकास और संशोधन के बजाय आस्था के नामपर नदियाँ पहले गंदी करने में खर्च होती है फिर उसे साफ में ।
ईसीलिये भारत देश विश्व के विकास के दृष्टि से बहोत पिछे है ।
(माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
सोमवार, 4 सितंबर 2017
नई सरकार का जनता से संघर्ष ।
देश कि नई सरकार जनता को बड़े बड़े सपने दिखाकर सरकार में आयी है । २०१४ में भारतीय जनता पार्टी ने देश कि जनता के सामने अपना मैन्यूफेस्टो पेश किया और टिवी ,प्रिंट, सोशियल मीडिया और समविचारी संघटनाओं के माध्यम से जोरशोर से उसका प्रचार भी किया था ।परिणाम यह हूवा कि इस प्रचार के बाढ में अच्छे अच्छे लोग बह गये । भाजपा ने प्रिंट,इलक्ट्रोनिक मीडिया खरीद कर और सोशियल साइट पर पगारी लोग लगाकर कोंग्रेस के खिलाफ बड़े पैमाने पर धुम मचाई थी। लोगों को अच्छे वादो कि खैरात और कोंग्रेस के काले कामो कि रोज सभी मीडिया पर हेडलाइन चल रही थी । इस कि वजह से जनता को भी मजबूर होकर मीडिया के सूरों में सूर मिलने पड़े थे । जनता को मानो नई सरकार द्वारा भारत देश में स्वर्ग आने कि संभावना पल्लवित हूई थी। हर भारतीय के बैंक अकाउंट में १५/१५ लाख आनेवाले थे ।हर एक को घर मिलने वाला था । सभी कि गरीबी दुर होनेवाली थी ।देश स्मार्ट सिटी बनाने वाला था ।समान नागरिक कायदा आनेवाला था ।कश्मीर पर कि धारा ३७० हटाने वाली थी ।किसानों कि आत्महत्याऐ रूकनी वाली थी ।आतंकवाद खत्म होनेवाला था ।नक्षलवाद खत्म होनेवाला था ।सभी को शिक्षा और सभी को काम मिलने वाला था ।यह सब १००/२०० दिन में होनेवाला था।। यू मानो कि भारत देश एक सोने कि चिड़िया बनाने जा रहा था ।
ईलक्शन हूवा नई सरकार आई और भाजपा ने अपने मैन्युफेस्टो को तुरंत श्रध्दांजली अर्पित कर दी और देश में गोमाताने भयानक रूप धारण किया है ।तलाक कि तलाश चालू हूई ।नोटबंदी हूई फिर भी। ना आतंकवाद रूका ना नक्षलवाद ।ना स्मार्ट सिटी बनी ना गरीबी हटी । ना लोगो को घर मिला ना रोजगार ।ना किसानों कि आत्महत्या रूकी ना महिलाओं पर के बलात्कार और न अत्याचार रूके । हूवा तो कुच्छ नहीं उल्टा पहले से भी जादा देश का माहौल बिगड़ गया है ।
नोटबंदी से सर्वसामान्य जनता का जनजीवन उध्वस्त हो गया है । एक तो देश कि जनता में शिक्षा का अभाव है ।कुच्छ जनता अशिक्षित है ।ऐसे जनता पर प्रगत राष्ट्र का डिजिटल व्यावहार थोपना कितना योग्य था? अपने देश में असंघटित कामगारों का भरना बहोत बड़े पैमाने पर है । जो रोज कि रोख रोजनदारी करते है ।ऐसे लोगो को डिजिटल पैसो से क्या लेना देना है जिनको हातके पैसे नही समझते है ? नोटबंदी से मार्केट का पैसा कम होने के कारण मजदूरो को मिलनेवाली मजदूरी पर बडा आसर पडा है ।जिनको रोज के ५०० ₹ मिलते थे ,अब मजबूरी से ३०० ₹रोजके लेने पड रहे है और उपर से जिएसटी के वजह से महंगाई बढ गई है । देश का जिडीपी घट गया है ।काले धन कि वजह से काले धन वाले का नही लेकिन इमानदार लोगो का बहुत बड़ा नुकसान हूवा है । रोजगार घट गया है ।नौकरिया छिन गई है ।और सरकार के मंत्री खुषीयो के मारे दुनिया भर के दौरे कर के देश पर कर्ज का बोझ बढ़ा रहे है । सरकार का एकमात्र उद्देश्य है कि देश के कोर्पोरेट सेक्टर को फायदा पहूचाके आनेवाले २०१९ के ईलक्शन को जितना है । क्योंकि २०१९ में यही कोर्पोरेट वाले ईलक्शन में जनता को पैसे ,दारू, खाना ,कपड़ा बाटने में भाजपा को मदत करेंगे और ईलक्शन जितवायेंगे । यह सब मिलने पर जनता भी नशे में नोटबंदी के साथ सारे दर्द भूल जायेगी ।
(माहाआचार्य मोहन गायकवाड)
पाली भाष्या एक रुप अनेक
असे म्हणतात कि सगळ्या भारतीय भाषेची जननी ही संस्कृत भाष्या आहे.याचा प्रचार साहीत्य ,श्याळा,कॉलेज,कथा,कादंबर्या, किर्तन ,नाटक ,सिनेमा ,आध्या...
-
आज मै आपको छत्रपती संभाजी महाराज का ऐसा इतिहास बताने जा रहा हू जो सूनकर आप हैरान रह जाओगे । महाराष्ट्र कि भूमी समतावादी समाज सुधारक ,संत ...
-
व्यास स्मृति के अध्याय-1 के श्लोक 11 व 12 में बढ़ई,नाई,गोप (अहीर या यादव) कुम्हार, बनिया, किरात, कायस्थ, माली, कुर्मी, नटकंजर, भंगी, दास व क...
-
शिक्षा कि पंढरी कहे जानेवाली नगरी और मनुवादी सोच का गढ पूणे के सिंहगड इलाके में एक चौकानेवाली घटना घटी है । जानकारी के अनुसार डॉ. मेधा क...
-
व्यक्तिमत्व विकास यह मानवी जीवन का एक अहमं और खास हिस्सा है । जो व्यक्ती के साथ साथ मानवी समाज को आर्थिक समाजिक शैक्षणिक तथा व्यक्ति व...
-
जगत गुरु संत तुकाराम माहाराज का पूरा नाम तुकाराम बोल्होबा अंबिले (मोरे) उनको तुकोबा ,तुकाराम ,तुकोबाराया ,तुकाराम माहाराज ऐसे कई नामो से ...
-
पूणे शहर को माहाराष्ट्र कि शिक्षा कि पंढरी कहा जाता है । वास्तव में क्या यह सही है ? यह एक लंबा संशोधन का विषय है । इतिहास से लेकर वर्त...
-
अगर आपको अपनी महान संस्कृती को बचाना है तो अपनी संस्कृती और धर्म का पालन करना बहोत जरूरी है । ईसीलिये अपने धर्म ग्रंथों में लिखे सारे नि...
-
अपने देश में भला ही संविधान लागू है । पर संविधान तो बस नाम के लिये है।जिसके बलबूते मनुवादी लोग अपनी सरकार तो बनाते है लेकिन अपने देश के न...
-
क्या आपको पता है ? ( पाकिस्तान आज का बांग्लादेश ) जैसूर और खुलना ईस संविधान निर्वाचन क्षेत्र को नियम तोड़कर पाकिस्तान में क्यों डाला है ?...
-
मेरे प्यारे भारतवासीयों आपको अज्ञान अधंकार से बाहर निकलना है तो आपको अपने इतिहास और अपने भारतीय वीरों के बारेमें जानकारी होना बहोत जरूरी ह...