सृष्टि का विकास हूवा है या कोई विषिष्ट ईश्वरने इस सृष्टि का निर्माण किया है ? अगर सृष्टि का निर्माण किसी विषिस्ट ईश्वर द्वारा किया गया है तो उस ईश्वर के किसी एक नामपर सारे धर्म वालो की सहमती क्यों नहीं बन पा रही है ? क्यों ओ अलग अलग ईश्वर के धर्मग्रंथ के और धर्मस्थल के नामपर लढ रहे है ? अलग अलग ईश्वर के अलग समर्थको के सामने आज यह बडा सवाल है और उनके पास इसका कोई ठोस जवाब नही है । सृष्टि का विकास होने की यह एक लंबी प्रकिया है । जो अब्जो वर्षों से निरंतरता से चालू है और आगे भी चलती रहेगी । यह सजिव और निर्जीव में चलनेवाली बदलाव की प्रक्रिया है । और इस बदलाव को हम सृष्टि कहते है ।
हर सजिव निर्जीव मे निरंतर बदलाव होता रहता है ।पर इस बदलाव को देखने की नजर हमारे पास होते हूए भी इसे हम समझ नही पा रहे है । इसका कारण हमारा अग्यान है । अग्यान का मतलब है शोध दृष्टि का आभाव । अब सवाल यह उठता है की हम पढ़े लिखे होने के बावजूद भी अग्यानी क्यों है ?
सारे अलग अलग धर्म वाले अपने अलग अलग धर्मग्रंथ के रचनाकारो के नाम अलग अलग बताते है । ईसका मतलब ईश्वर एक नहीं है इसीलिये अलग अलग ईश्वरने अलग अलग धर्म और धर्मग्रंथो की रचना की गई है । अब इन अलग ईश्वरो का पृथ्वी स्वर्ग ,नर्क और पाताल का सारा कारोबार सब अलग है । मतलब हर ईश्वर का स्वर्ग- नर्क ,खाना- पीना , रहन-सहन ,प्रार्थना स्थल और प्रार्थना सबकुछ अलग अलग है । अब आपको यह तय करना है कि इनमेंसे कौनसा ईश्वर सही है और किसके धर्म में जाना है । और कौनसे स्वर्ग में जाना है ? क्योंकि सभी धर्म और ईश्वरो का कारोबार अलग अलग है और हर जगह उनके अपनी सिमाओ से लेकर प्रार्थना स्थल और प्रार्थना और खाने-पीने से लेकर हर चिजो के लिये ईश्वर और उनके चाहनेवालों में झगड़े होते रहते है । अब आपको ऐसे अशांती के माहौल में ईश्वर के हूकुम का पालन करना होता है । फिर भी आपकी ईश्वर से ना स्वर्ग में मूलाकात होगी ना नर्क में । आपको ईश्वर को देखने वाला इन्सान कहीपर भी नही मीलेगा आपको बस लोगो पर और धर्मग्रंथ पर विस्वास रखना है और अपना जीवन व्यतित करना है । यू समझो आप अधेरें मार्ग के मूसाफीर है और आपको अपनी खुदकी रक्षा के लिये झुंड में रहना है और आपकी और धर्मग्रंथ की बात ना माननेवाले बेकसूर लोगों के जीवन में बाधा पैदा करना है या उनको खत्म करना यही ईश्वरीय आदेश है जिसका आपको पालन करना है । क्योंकि ईश्वर की बात नकारने वाले को सजा देनेकी क्षमता ईश्वर के पास नही है । अब आपको धर्म के अधिन रहकर ही जिना है जीसका आपको ना आता है ना पता है ।
लेखक: माहाआचार्य मोहन गायकवाड
मंगलवार, 19 दिसंबर 2017
ईश्वर का घर मिल गया है
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
पाली भाष्या एक रुप अनेक
असे म्हणतात कि सगळ्या भारतीय भाषेची जननी ही संस्कृत भाष्या आहे.याचा प्रचार साहीत्य ,श्याळा,कॉलेज,कथा,कादंबर्या, किर्तन ,नाटक ,सिनेमा ,आध्या...
-
आज मै आपको छत्रपती संभाजी महाराज का ऐसा इतिहास बताने जा रहा हू जो सूनकर आप हैरान रह जाओगे । महाराष्ट्र कि भूमी समतावादी समाज सुधारक ,संत ...
-
व्यास स्मृति के अध्याय-1 के श्लोक 11 व 12 में बढ़ई,नाई,गोप (अहीर या यादव) कुम्हार, बनिया, किरात, कायस्थ, माली, कुर्मी, नटकंजर, भंगी, दास व क...
-
शिक्षा कि पंढरी कहे जानेवाली नगरी और मनुवादी सोच का गढ पूणे के सिंहगड इलाके में एक चौकानेवाली घटना घटी है । जानकारी के अनुसार डॉ. मेधा क...
-
व्यक्तिमत्व विकास यह मानवी जीवन का एक अहमं और खास हिस्सा है । जो व्यक्ती के साथ साथ मानवी समाज को आर्थिक समाजिक शैक्षणिक तथा व्यक्ति व...
-
जगत गुरु संत तुकाराम माहाराज का पूरा नाम तुकाराम बोल्होबा अंबिले (मोरे) उनको तुकोबा ,तुकाराम ,तुकोबाराया ,तुकाराम माहाराज ऐसे कई नामो से ...
-
पूणे शहर को माहाराष्ट्र कि शिक्षा कि पंढरी कहा जाता है । वास्तव में क्या यह सही है ? यह एक लंबा संशोधन का विषय है । इतिहास से लेकर वर्त...
-
अगर आपको अपनी महान संस्कृती को बचाना है तो अपनी संस्कृती और धर्म का पालन करना बहोत जरूरी है । ईसीलिये अपने धर्म ग्रंथों में लिखे सारे नि...
-
अपने देश में भला ही संविधान लागू है । पर संविधान तो बस नाम के लिये है।जिसके बलबूते मनुवादी लोग अपनी सरकार तो बनाते है लेकिन अपने देश के न...
-
क्या आपको पता है ? ( पाकिस्तान आज का बांग्लादेश ) जैसूर और खुलना ईस संविधान निर्वाचन क्षेत्र को नियम तोड़कर पाकिस्तान में क्यों डाला है ?...
-
मेरे प्यारे भारतवासीयों आपको अज्ञान अधंकार से बाहर निकलना है तो आपको अपने इतिहास और अपने भारतीय वीरों के बारेमें जानकारी होना बहोत जरूरी ह...
hindu astrology
जवाब देंहटाएंindian upanishads
indian astrology online
ancient indian culture
Vedic Ritual
cultural heritage sites of india
indian art and culture
जवाब देंहटाएंindian culture and heritage
indian contemporary art
ancient indian art